NOW HINDUSTAN korba. स्वतंत्रता दिवस 15 अगस्त से पूर्व देशभर में तिरंगा यात्राओं का आयोजन कर राष्ट्रभक्ति और राष्ट्रीय ध्वज के सम्मान का संदेश दिया जा रहा है। इसी कड़ी में कोरबा के बालको क्षेत्र में भी भाजपा नेताओं एवं कार्यकर्ताओं द्वारा तिरंगा यात्रा निकाली गई। लेकिन इस यात्रा से जुड़ी एक वायरल तस्वीर ने अब आयोजन को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। तस्वीर में यात्रा की अगुवाई कर रहे पूर्व नेता प्रतिपक्ष एवं पार्षद हितानंद अग्रवाल के हाथ में तिरंगा कथित तौर पर उल्टा दिखाई दे रहा है। उनके पीछे कुछ अन्य लोगों के हाथों में मौजूद ध्वज भी तस्वीर में उल्टे नजर आ रहे हैं।
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बताया जा रहा है कि बालको मंडल अध्यक्ष डिलेंद्र यादव, वरिष्ठ नेत्री मंजू सिंह सहित भाजपा के अन्य पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता इस तिरंगा यात्रा में शामिल हुए थे। यात्रा के दौरान भारत माता के जयकारों और राष्ट्रभक्ति के नारों के साथ कार्यकर्ता बालको क्षेत्र के विभिन्न मार्गों और मोहल्लों से होकर गुजरे।
वायरल तस्वीर के बाद शुरू हुई चर्चा
तिरंगा यात्रा की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर प्रचारित किए गए। इसी दौरान एक तस्वीर लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गई, जिसमें राष्ट्रीय ध्वज की दिशा को लेकर सवाल उठाए गए। तस्वीर वायरल होने के बाद कथित तौर पर संबंधित तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया से हटा दिए गए।
यही वजह है कि अब क्षेत्र में चर्चा है कि यदि तस्वीर में दिखाई दे रहा ध्वज वास्तव में उल्टा था, तो यात्रा शुरू होने से पहले इस पर किसी की नजर क्यों नहीं गई? खासकर जब यात्रा में वरिष्ठ नेता और संगठन के पदाधिकारी मौजूद थे, तब राष्ट्रीय ध्वज की स्थिति की जांच क्यों नहीं की गई?
देशभक्ति के आयोजन में छोटी चूक भी बनती है बड़ा सवाल
राष्ट्रीय ध्वज देश की आन-बान-शान और राष्ट्रीय गौरव का प्रतीक है। तिरंगा यात्रा जैसे आयोजन का मूल उद्देश्य ही लोगों में तिरंगे के प्रति सम्मान और देशभक्ति की भावना पैदा करना होता है। ऐसे में ध्वज से जुड़ी किसी भी चूक पर लोगों का ध्यान जाना स्वाभाविक है।
हालांकि, वायरल तस्वीर को लेकर यह भी माना जा सकता है कि ध्वज उल्टा होना अनजाने में हुई मानवीय त्रुटि हो सकती है। लेकिन सवाल यह है कि यात्रा में शामिल जिम्मेदार लोगों में से किसी ने समय रहते इस गलती को क्यों नहीं देखा?
संगठन की जिम्मेदारी पर भी उठे सवाल
अब इस मामले को लेकर भाजपा के जिला संगठन और तिरंगा यात्रा से जुड़े जिम्मेदार पदाधिकारियों की भूमिका को लेकर भी चर्चा हो रही है। सवाल यह है कि क्या संगठन इसे महज मानवीय भूल मानकर छोड़ देगा या फिर भविष्य में ऐसे आयोजनों के दौरान राष्ट्रीय ध्वज की गरिमा और निर्धारित नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए कार्यकर्ताओं को आवश्यक दिशा-निर्देश देगा।
फिलहाल, वायरल तस्वीर के बाद तस्वीरों और वीडियो को सोशल मीडिया से हटाए जाने की चर्चा ने पूरे मामले को और दिलचस्प बना दिया है। हालांकि तस्वीर और उसके बाद उसे हटाए जाने के कारणों को लेकर संबंधित आयोजकों की ओर से कोई स्पष्ट आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
तिरंगा यात्रा राष्ट्रभक्ति का संदेश देने के लिए निकाली गई थी, लेकिन वायरल तस्वीर ने आयोजन की व्यवस्थाओं और राष्ट्रीय ध्वज के प्रति बरती गई सावधानी पर सवाल जरूर खड़े कर दिए हैं।
