भोजली की हरियाली में दिखेगी छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति, 29 अगस्त को कोरबा में प्रदेश स्तरीय रैलीका आयोजन …..

Rajesh Kumar Mishra
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NOW HINDUSTAN. कोरबा। छत्तीसगढ़िया क्रान्ति सेना (गैर-राजनीतिक संगठन ) द्वारा छत्तीसगढ़ की पारंपरिक लोकसंस्कृति और भोजली पर्व की परंपरा को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से 29 अगस्त को कोरबा के घंटाघर चौक में भव्य प्रदेश स्तरीय भोजली रैली एवं महोत्सव का आयोजन किया जाएगा। संगठन के प्रदेश संयोजक दिलीप मिरी ने गुरुवार को तिलक भवन में आयोजित पत्रकार वार्ता में आयोजन की जानकारी दी।

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दिलीप मिरी ने कहा कि भोजली केवल एक धार्मिक रस्म या टोकरी में उगे जौ का पौधा नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की प्रकृति, आस्था, परंपरा और सामाजिक भाईचारे का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि हमारे पुरखों ने बारिश की बूंदों को गंगा मैया का स्वरूप मानते हुए मिट्टी में जौ बोकर प्रकृति के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने की परंपरा शुरू की थी। भोजली इसी लोकआस्था और प्रकृति प्रेम की जीवंत अभिव्यक्ति है।

भोजली से जुड़ी है मितान परंपरा
संगठन ने कहा कि भोजली पर्व में छत्तीसगढ़ की मितान परंपरा का भी विशेष महत्व है। भोजली का तिनका कान के पीछे खोंसकर एक-दूसरे से हाथ मिलाने की परंपरा सामाजिक रिश्तों को मजबूत करने का संदेश देती है। इस परंपरा में जाति, ऊंच-नीच और भेदभाव से ऊपर उठकर मया, अपनापन और भाईचारे को महत्व दिया जाता है।

प्रदेशभर से पहुंचेंगे लोक कलाकार
आयोजकों के अनुसार 29 अगस्त को होने वाली रैली में छत्तीसगढ़ के विभिन्न अंचलों से लोक कलाकार शामिल होंगे। रैली में पारंपरिक लोकनृत्य, लोकसंगीत और छत्तीसगढ़ की पुरखौती संस्कृति को प्रदर्शित करने वाली झांकियां आकर्षण का केंद्र रहेंगी। इसके माध्यम से एक ही मंच पर प्रदेश की विविध लोकसंस्कृति की झलक देखने को मिलेगी।

पारंपरिक वेशभूषा में शामिल होंगी महिलाएं
रैली में दाई-बहनें पारंपरिक वेशभूषा में सिर पर भोजली का कलश रखकर शामिल होंगी। मांदर की थाप, झांझ-मंजीरे की झंकार और लोकगीतों से घंटाघर चौक गूंजेगा। भोजली विसर्जन के बाद एक-दूसरे को भोजली भेंट कर भाईचारे, सामाजिक सौहार्द और मया-दुलार का संदेश दिया जाएगा।

नई पीढ़ी को संस्कृति से जोड़ने का प्रयास
छत्तीसगढ़िया क्रान्ति सेना ने कहा कि आधुनिक दौर में बच्चे मोबाइल और डिजिटल दुनिया में अधिक समय बिता रहे हैं। ऐसे समय में भोजली, करमा, सुआ, पंथी सहित छत्तीसगढ़ की लोकपरंपराओं से नई पीढ़ी को जोड़ना जरूरी है। संगठन का कहना है कि यह आयोजन प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करने और पुरखों की विरासत को आगे बढ़ाने की दिशा में एक प्रयास है।
पत्रकार वार्ता में संगठन ने प्रदेशवासियों से बड़ी संख्या में शामिल होकर भोजली पर्व और छत्तीसगढ़ी संस्कृति के इस आयोजन को सफल बनाने की अपील की। इस प्रेसवार्ता में जिला संयोजक अतुल दास महंत, प्रदेश उपाध्यक्ष उमा गोपाल, जिलाध्यक्ष एलेक्जेन्ड़र टोप्पो, जिलाध्यक्ष महिला विंग विमला ध्रुव , मीडिया प्रभारी कन्हैया सुंदर, समेत कार्यकर्ता मौजूद रहे।

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