लुतरा शरीफ में 68वें सालाना उर्स-ए-पाक का परचम कुशाई के साथ आगाज

Rajesh Kumar Mishra
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NOW HINDUSTAN. Korba. बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के प्रसिद्ध धार्मिक एवं सूफी स्थल लुतरा शरीफ में शहंशाह-ए-छत्तीसगढ़ हज़रत बाबा सैय्यद इंसान अली शाह रहमतुल्लाहि अलैह के 68वें सालाना उर्स-ए-पाक का आगाज सोमवार को पारंपरिक परचम कुशाई के साथ किया गया। परचम कुशाई के मौके पर बड़ी संख्या में जायरीन और अकीदतमंद लुतरा शरीफ पहुंचे और बाबा की बारगाह में हाजिरी देकर मुल्क व कौम की खुशहाली, अमन और भाईचारे के लिए दुआएं कीं।

उर्स-ए-पाक के आगाज के साथ ही दरगाह परिसर में आध्यात्मिक माहौल देखने को मिला। अकीदतमंदों ने बड़ी अकीदत और एहतराम के साथ दरगाह पर चादर पेश की तथा फातिहा पढ़कर अपनी मन्नतें मांगीं। दूर-दराज से पहुंचे जायरीनों के लिए दरगाह इंतजामिया कमेटी की ओर से आवश्यक व्यवस्थाएं की गई हैं।
इस अवसर पर दरगाह इंतजामिया कमेटी लुतरा शरीफ के सदर हाजी इकबाल हक एवं कमेटी के पदाधिकारियों और सदस्यों ने उर्स की व्यवस्थाओं की निगरानी की। कमेटी की ओर से जायरीनों से उर्स के दौरान आपसी भाईचारा, शांति और अनुशासन बनाए रखने की अपील की गई।

उर्स के आगामी दिनों में विभिन्न धार्मिक और रूहानी कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इनमें गुस्ले मजार, शाही संदल-चादर, जश्ने दस्तारे हिफ्ज, तकरीरी कार्यक्रम, नातिया मुशायरा और महफिले समां एवं कव्वाली जैसे कार्यक्रम प्रमुख हैं। इन कार्यक्रमों में देश के विभिन्न हिस्सों से आने वाले उलेमा, शायर, नातख्वां और कव्वाल शिरकत करेंगे।
दरगाह इंतजामिया कमेटी ने बताया कि उर्स-ए-पाक में शामिल होने के लिए छत्तीसगढ़ सहित देश के विभिन्न राज्यों से जायरीनों के पहुंचने का सिलसिला जारी है। दरगाह परिसर में साफ-सफाई, पेयजल, रोशनी, पार्किंग तथा अन्य जरूरी व्यवस्थाओं पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

परचम कुशाई के साथ शुरू हुआ यह पांच दिवसीय उर्स 2 अक्टूबर तक जारी रहेगा। उर्स के समापन अवसर पर कुल शरीफ की फातिहा के साथ देश में अमन, खुशहाली और भाईचारे के लिए विशेष दुआ की जाएगी।

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