NOW HINDUSTAN. कोरबा। देश के विभिन्न शहरों और कस्बों में इन दिनों अलग-अलग नामों से चाय बेचने वाली दुकानों की संख्या तेजी से बढ़ती नजर आ रही है। इन दुकानों पर लोगों की भीड़ भी देखने को मिलती है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि इन चायों के स्वाद और लोकप्रियता के पीछे आखिर क्या कारण है?
चाय में सामान्य रूप से कैफीन सहित प्राकृतिक घटक मौजूद होते हैं और इसका सेवन लोगों को जागरूकता तथा ताजगी का अनुभव करा सकता है। लेकिन केवल लोगों की बढ़ती पसंद के आधार पर यह निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा कि किसी चाय में कोई नशीला या लत लगाने वाला पदार्थ मिलाया जा रहा है।
हालांकि, यदि किसी विशेष चाय के स्वाद, खुशबू या सेवन के बाद बार-बार पीने की इच्छा को लेकर उपभोक्ताओं के बीच संदेह है, तो इसकी वैज्ञानिक जांच कराना जरूरी है। विशेष रूप से खाद्य एवं औषधि प्रशासन को अलग-अलग दुकानों से चाय के नमूने लेकर अधिकृत प्रयोगशाला में जांच करानी चाहिए।
जांच में यह देखा जा सकता है कि चाय में निर्धारित मानकों के अनुरूप चायपत्ती का उपयोग हो रहा है या नहीं, किसी प्रकार का गैर-अनुमत रंग, फ्लेवर, मिलावट, दूषित पदार्थ अथवा अन्य प्रतिबंधित सामग्री तो मौजूद नहीं है। FSSAI के पास चाय सहित खाद्य पदार्थों की जांच के लिए निर्धारित मानक और विश्लेषण पद्धतियां उपलब्ध हैं।
उपभोक्ताओं की सेहत से जुड़ा सवाल
गुड़ वाली चाय, मसाला चाय और अन्य प्रकार की चाय भी कई जगह लोकप्रिय हैं। ऐसे उत्पादों में इस्तेमाल होने वाली चायपत्ती, मसाले, मिठास देने वाले पदार्थ और अन्य सामग्री की गुणवत्ता की जांच भी महत्वपूर्ण है।
इस पूरे मामले में किसी ब्रांड या दुकानदार पर बिना जांच के मिलावट अथवा नशीला पदार्थ मिलाने का आरोप लगाना उचित नहीं होगा। लेकिन उपभोक्ताओं के बीच उठ रहे सवालों को देखते हुए खाद्य सुरक्षा विभाग द्वारा नमूने लेकर जांच कराई जाए तो स्थिति स्पष्ट हो सकती है।
सवाल यही है कि इन चायों की लोकप्रियता केवल स्वाद और गुणवत्ता की वजह से है या इनके निर्माण में इस्तेमाल होने वाली सामग्री की भी कोई विशेष भूमिका है? इसका जवाब प्रयोगशाला जांच के बाद ही सामने आ सकता है।
