करतला जनपद में अफसरशाही हावी, जनप्रतिनिधियों का समय बर्बाद, चार बार हिदायत के बाद भी कई अधिकारी बैठक से नदारद, सीईओ के संज्ञान में मामला होने के बावजूद नहीं सुधरी व्यवस्था…..

Rajesh Kumar Mishra
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NOW HINDUSTAN. Korba. करतला। जनपद पंचायत करतला की महत्वपूर्ण बैठक एक बार फिर अधिकारियों की गैरमौजूदगी के कारण प्रभावित हुई। जनपद अध्यक्ष, उपाध्यक्ष सहित सदस्य निर्धारित समय पर बैठक में मौजूद रहे, लेकिन कई महत्वपूर्ण विभागों के अधिकारी और कर्मचारी बैठक से अनुपस्थित रहे। इससे जनता से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर संबंधित विभागों से जवाब और चर्चा नहीं हो सकी।

बताया जा रहा है कि अधिकारियों की अनुपस्थिति का मुद्दा पहले भी कई बैठकों में उठ चुका है और संबंधित अधिकारियों को करीब चार बार हिदायत दिए जाने की बात सामने आई है। इसके बावजूद स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं होने से जनप्रतिनिधियों में नाराजगी देखी जा रही है।

जनप्रतिनिधि पहुंचे, अधिकारी रहे नदारद

जनपद सदस्य अपने-अपने क्षेत्रों की सड़क, बिजली, पानी, शिक्षा, स्वास्थ्य, आवास, रोजगार और सरकारी योजनाओं से जुड़ी समस्याएं लेकर बैठक में पहुंचे थे। उम्मीद थी कि संबंधित विभागों के अधिकारियों की मौजूदगी में समस्याओं पर चर्चा होगी और आवश्यक कार्रवाई की दिशा तय की जाएगी।
बैठक में खाद्य एवं शिक्षा विभाग के अधिकारी मौजूद रहे, जबकि कई अन्य महत्वपूर्ण विभागों के अधिकारी और कर्मचारी अनुपस्थित बताए गए। ऐसे में संबंधित विभागों से जुड़े सवालों का जवाब नहीं मिल सका।

चार बार हिदायत के बाद भी नहीं बदली स्थिति

जनप्रतिनिधियों के अनुसार अधिकारियों की गैरमौजूदगी कोई नई बात नहीं है। पूर्व की बैठकों में भी इस संबंध में आपत्ति जताई जा चुकी है। अधिकारियों को बैठक में अनिवार्य रूप से उपस्थित रहने के लिए कई बार हिदायत दिए जाने की जानकारी सामने आई है।
इसके बावजूद दोबारा कई अधिकारियों का बैठक में नहीं पहुंचना प्रशासनिक व्यवस्था और अधिकारियों की जवाबदेही को लेकर सवाल खड़े कर रहा है।

सीईओ के संज्ञान में मामला, फिर भी सवाल बरकरार

बताया गया है कि अधिकारियों की अनुपस्थिति का मामला जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी के संज्ञान में भी पहले ही लाया जा चुका है। इसके बावजूद स्थिति में सुधार नहीं होने पर जनप्रतिनिधियों के बीच यह सवाल उठ रहा है कि बैठक में सभी संबंधित अधिकारियों की उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए प्रभावी व्यवस्था क्यों नहीं बनाई गई।
हालांकि, संबंधित अधिकारियों की अनुपस्थिति के कारण और उनके पक्ष की जानकारी सामने नहीं आ सकी है। यदि किसी अधिकारी के लिए बैठक में उपस्थित होना संभव नहीं था, तो क्या इसकी पूर्व सूचना दी गई थी और क्या उनके स्थान पर किसी सक्षम प्रतिनिधि को भेजा गया था—यह भी स्पष्ट होना बाकी है।

खाली कुर्सियों ने उठाए कई सवाल

जनपद पंचायत की बैठकें ग्रामीण क्षेत्रों की समस्याओं पर विभागीय स्तर पर चर्चा और समाधान की दिशा तय करने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं। ऐसे में संबंधित विभागों के अधिकारियों की अनुपस्थिति से बैठक का उद्देश्य प्रभावित होने की आशंका रहती है।
जनप्रतिनिधियों का कहना है कि वे अपने निजी कार्यों के लिए नहीं, बल्कि क्षेत्र की जनता की समस्याएं लेकर बैठक में पहुंचते हैं। यदि संबंधित अधिकारी ही मौजूद नहीं होंगे तो ग्रामीणों की समस्याओं पर जवाब और कार्रवाई की जानकारी कैसे मिलेगी?

अब हिदायत नहीं, जवाबदेही तय करने की मांग

चार बार हिदायत दिए जाने के बाद भी स्थिति में बदलाव नहीं होने पर अब जनप्रतिनिधियों की ओर से केवल निर्देश देने के बजाय जवाबदेही तय करने की मांग उठ रही है।
जनप्रतिनिधियों का कहना है कि यदि कोई अधिकारी अपरिहार्य कारणों से बैठक में उपस्थित नहीं हो सकता तो इसकी पूर्व सूचना दी जानी चाहिए और उसकी जगह सक्षम अधिकारी या प्रतिनिधि को भेजा जाना चाहिए, ताकि जनता से जुड़े मुद्दे लंबित न रहें।

अगली बैठक पर रहेगी नजर

अब देखना होगा कि अगली जनपद पंचायत बैठक में सभी संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित होते हैं या फिर जनप्रतिनिधियों को एक बार फिर अधिकारियों का इंतजार करना पड़ता है।
करतला जनपद की मौजूदा स्थिति ने प्रशासन के सामने एक अहम सवाल खड़ा किया है—जब जनप्रतिनिधि जनता की समस्याएं लेकर बैठक में समय पर पहुंच सकते हैं, तो संबंधित विभागों के अधिकारियों की उपस्थिति सुनिश्चित क्यों नहीं हो पा रही है?
अब जरूरत केवल हिदायत देने की नहीं, बल्कि बैठक में अधिकारियों की उपस्थिति और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए प्रभावी व्यवस्था बनाने की है।

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