बोर-हैंडपंप के नाम पर लाखों खर्च, अखरापाली में नहीं सुधरी पेयजल व्यवस्था
NOW HINDUSTAN. कोरबा जनपद पंचायत क्षेत्र की ग्राम पंचायत अखरापाली में पेयजल संकट को लेकर सवाल उठने लगे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि बोर खनन, हैंडपंप स्थापना और मरम्मत कार्यों के नाम पर 15वें वित्त आयोग की लाखों रुपये की शासकीय राशि खर्च किए जाने के बावजूद गांव में पेयजल व्यवस्था में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ है।
पीएचई विभाग द्वारा भी घरो घर पाईप लाईन बिछाई गई है लेकिन उसमें भी पानी नही आ रहा है। साथ ही ग्रामीणों का कहना है कि गांव के विभिन्न मोहल्लों और बस्तियों में पेयजल सुविधा उपलब्ध कराने के लिए बोर खनन, हैंडपंप स्थापना और मरम्मत सहित कई कार्यों के नाम पर राशि खर्च की गई। इसके बावजूद लोगों को पानी के लिए परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में शासकीय राशि के उपयोग और कराए गए कार्यों की वास्तविक स्थिति को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि पेयजल व्यवस्था को दुरुस्त करने के उद्देश्य से सरकारी राशि खर्च की गई है, तो उसका लाभ लोगों को क्यों नहीं मिल रहा है? उनका आरोप है कि कुछ कार्यों के नाम पर राशि आहरित किए जाने के बावजूद मौके पर अपेक्षित निर्माण या मरम्मत कार्य दिखाई नहीं दे रहे हैं।
मामले में ग्रामीणों ने फर्जी जियो-टैगिंग के माध्यम से शासकीय राशि निकाले जाने की आशंका भी जताई है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और संबंधित अधिकारियों या पंचायत प्रतिनिधियों का पक्ष सामने आना बाकी है।
जांच की मांग, खर्च और कार्यों का हो सत्यापन
ग्रामीणों ने पेयजल व्यवस्था के नाम पर खर्च की गई राशि, स्वीकृत कार्यों, भुगतान संबंधी अभिलेखों और जियो-टैगिंग की जांच कराने की मांग उठाई है। उनका कहना है कि यदि किसी प्रकार की अनियमितता सामने आती है, तो जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए। अब यह देखना होगा कि संबंधित विभाग मामले को गंभीरता से लेते हुए स्थल निरीक्षण और अभिलेखों का सत्यापन कराता है या नहीं।
इसी तरह से अन्य कई गांव की शिकायत सामने आ रही है कि वहां भी जमकर भ्रष्टाचार किया जा रहे हैं
