
कोरबा NOW HINDUSTAN. काकेर जिला उत्तर बस्तर उपभोक्ता विवाद प्रतितोषण आयोग ने अपने बहुचर्चित फैसले में एक विधवा महिला को न्याय दिलाया है और धांधली करने वाली निजी बीमा कंपनी पर ब्याज सहित जुर्माना एवं उपभोक्ता के अदालती खर्च के अलावा मानसिक पीड़ा का हर्जाना भी दिलाया है। उपभोक्ता श्रीमती पमिता सोनी के पति स्वर्गीय तरुण सोनी ने फाइनेंस करा कर एक कार खरीदी थी, जिसका बीमा कोलकाता की एक निजी बीमा कंपनी ने किया था। बीमा पॉलिसी सन् 2020 तक के लिए थी लेकिन जब तरुण सोनी की आकस्मिक मृत्यु सन् 2018 में हो गई तो कंपनी बीमा की रकम देने में हीला हवाला करने लगी । हद तो तब हो गई, जब बीमा कंपनी ने श्रीमती पमिता सोनी के पत्रों के जवाब भी देना बंद कर दिया। इस रवैये से व्यथित होकर श्रीमती सोनी ने कांकेर की उपभोक्ता अदालत (जिसे पहले उपभोक्ता फोरम कहते थे और अब इसका पूरा नाम उपभोक्ता विवाद प्रतितोषण आयोग हो चुका है)।यहां उन्होंने अर्जी लगाकर बीमा की रकम ब्याज, हरजाना आदि का दावा पेश कर दिया। उपभोक्ता विवाद प्रति तोषण आयोग ने मामले का गहन अध्ययन कर यह पाया कि दावाकर्ता वास्तविक उपभोक्ता है और कंपनी ने सेवा की कमी का अपराध करते हुए व्यावसायिक कदाचरण का कार्य किया है। अतः जवाबदारी से मुकरने वाली तथा पेशियों पर अनुपस्थित रहने वाली कंपनी के विरुद्ध एकतर्फा फैसला देते हुए उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 2019 की धारा 35 के तहत उपभोक्ता आयोग की अध्यक्ष श्रीमती सुजाता जसवाल तथा सदस्य डाकेश्वर सोनी वकील साहब ने एक माह के अंदर बीमा की रकम 3,44 ,000/ तथा उसका ब्याज, अदालती खर्च रुपए 5000/ मानसिक पीड़ा का हरजाना ₹10000/ पीड़ित पक्ष श्रीमती पमिता सोनी को अदा करने का आदेश अपने निर्णय में दिया है। आम जनता में चर्चा है कि उपभोक्ता आयोग ने वास्तविक इंसाफ़ किया है और विधवा महिला को राहत दिलाई है। यह फ़ैसला उन सभी लोगों के लिए प्रेरक है ,जो निजी बीमा कंपनियों के जाल में फँस जाते हैं और अपनी जमा पूंजी गँवा बैठते हैं।
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