अपनी 40 वर्ष की अकादमिक सेवा में हमेशा मैंने टीचिंग को ही प्राथमिकता दी है: डॉ यूके श्रीवास्तव….

Rajesh Kumar Mishra
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कोरबा NOW HINDUSTAN आपके जीवन का लक्ष्य क्या है, जीवन में क्या बनना चाहते हैं, ये तो मैं नहीं जानता पर अगर आप बीएससी कर रहे हैं, बीसीए पढ़ रहे हैं या गणित से जुड़े हुए हैं तो आपका दिमाग हमेशा खुला रहेगा और आप जो भी रास्ता चयनित करोगा, वह आपके लिए आसान होता चला जाएगा। बल्कि मेरा अनुभव तो यह भी कहता है कि जिनका बैग्राउंड गणित से है, वे पीएससी और यूपीएससी जैसे कठिनतम प्रतियोगी परीक्षाओं में भी अपेक्षाकृत ज्यादा सफल रहे हैं।
यह बातें शासकीय ई राघवेंद्र राव स्नातकोत्तर विज्ञान महाविद्यालय के गणित विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ यूके श्रीवास्तव ने कमला नेहरु महाविद्यालय कोरबा में विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहीं। एक कार्यक्रम में शामिल होने कोरबा पहुंचे डॉ श्रीवास्तव ने कमला नेहरु कॉलेज के प्राचार्य डॉ प्रशांत बोपापुरकर के आग्रह पर अपना कुछ वक्त कॉलेज के विद्यार्थियों को अपना महत्वपूर्ण मार्गदर्शन प्रदान किया। इस दौरान उन्होंने विज्ञान, गणित, आईटी और कंप्यूटर साइंस समेत विभिन्न विषय-संकाय के छात्र-छात्राओं को कॅरियर और प्रतियोगी परीक्षाओं के साथ विज्ञान व गणित में अनेक महत्वपूर्ण बिंदुओं पर अपने अनुभव साझा किए। डॉ श्रीवास्तव ने कहा कि मुझे विद्यार्थियों से मिलना हमेशा अच्छा लगता है। लगभग 40 वर्ष की अपनी अकादमिक सेवा में हमेशा टीचिंग को ही प्राथमिकता दी है।
बहुत साल पहले की बात है, जब मैं खुद पढ़ा करता था। तब के दौर में आईएएस बनने की दिशा में चर्चा ज्यादा रहती। लोग कहा करते थे कि आईएएस बनने के लिए कला संकाय का चयन उपयुक्त रहेगा। उस समय कॅरियर गाइडेंस पर आधारित एक पत्रिका कॉम्पिटिशंस सक्सेस रिव्यू आती थी, जिसे मैं पढ़ा करता था। मुझे नाम तो याद नहीं, पर उस दौर में एक युवा ने आईएएस में टॉप किया था। उसने भी गणित और भौतिक लिया था, जो कि उस दौर में सामान्यतः नहीं लिए जाते थे। इस कार्यक्रम में अकादमिक विभाग से प्रमुख रुप से डॉ बीना विश्वास, अनिल राठौर, दीप्ति सिंह, मंजू विशाक नायर, सुरेंद्र कुर्रे, ओकेश्वर भारद्वाज, मालती बंजारे वह छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।

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डॉ श्रीवास्तव ने अपनी बातें समाप्त करने के बाद विद्यार्थियों से अपनी जिज्ञासाओं के समाधान करने का अवसर दिया। बीएससी (गणित-भौतिक व सीएस) द्वितीय वर्ष के छात्र कोणार्क देवांगन ने पूछा कि मुझे रिसर्च के क्षेत्र में जाना है, तो क्या मैंने सही विषय चुना है। इसका जवाब देते हुए डॉ श्रीवास्तव ने कहा कि जिन विषयों को आपने चुना है, वह बिलकुल सही है। इनमें से जिस पर आपको रुचि है, उस पर पीएचडी कर अपने कॅरियर को मुकाम दे सकते हैं। इसी तरह एमएससी गणित तृतीय सेमेस्टर की छात्रा क्वीनी यादव ने भी पीएचडी को लक्ष्य बताते हुए अपना सवाल पूछा, कि क्या मुझे अपना विषय चुनने का अवसर मिलेगा। इस पर डॉ श्रीवास्तव ने कहा कि आम तौर पर यह अवसर आपके गाइड पर निर्भर करता है। गाइड की विशेषज्ञता और एलॉट विषय के अनुरुप जो भी विषय होगा, उसी में वह अपने शोधार्थी को रिसर्च के विषय दे सकता है।

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