SECL दीपका में CISF जवानों की तानाशाही, ग्रामीणों के साथ दुर्व्यवहार और खदान में संरक्षित चोरी का आरोप……..

Rajesh Kumar Mishra
Rajesh Kumar Mishra
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NOW HINDUSTAN korba. एसईसीएल (SECL) दीपका क्षेत्र में तैनात सीआईएसएफ (CISF) के जवानों की कार्यप्रणाली पर अब गंभीर सवाल उठने लगे हैं एक ओर जहां श्रमिक चौक पर आम ग्रामीणों के साथ जवानों द्वारा बदसलूकी और ‘गुंडागर्दी’ की जा रही है वहीं दूसरी ओर खदान के भीतर करोड़ों की सरकारी संपत्ति की सुरक्षा में भारी सेंधमारी हो रही है।

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*​आम रास्ते पर जवानों की गुंडागर्दी*

​श्रमिक चौक, जो रेंकी सुवाभोड़ी चैनपुर हरदीबाजार सहित दर्जनों गांवों को जोड़ने वाला मुख्य मार्ग है वहां से गुजरने वाले ग्रामीणों को CISF जवानों द्वारा बेवजह परेशान किया जा रहा है ग्रामीणों का आरोप है कि जवान आम नागरिकों के साथ अपराधियों जैसा व्यवहार करते हैं और गाली-गलौज व दुर्व्यवहार अब आम बात हो गई है आवागमन बाधित होने से स्कूली बच्चों मरीजों और कामगारों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है ।

*​खदान में सुरक्षा तार-तार, कबाड़ और डीजल का गोरखधंधा*

​चौंकाने वाली बात यह है कि जो जवान आम जनता पर अपनी ताकत दिखाते हैं वही खदान के भीतर सुरक्षा देने में पूरी तरह नाकाम साबित हो रहे हैं ।

*दीपका खदान से बड़े पैमाने पर*

०१. ​डीजल चोरी:- मशीनों और टैंकों से लगातार डीजल निकाला जा रहा है ।
०२. ​कबाड़ तस्करी:- मशीनी कबाड़ और लोहे की सामग्री खुलेआम पार की जा रही है ।
०३. ​अन्य सामग्री:- कीमती उपकरणों और अन्य सामग्रियों की चोरी बदस्तूर जारी है ।

*​क्या जवानों का है ‘मौन समर्थन’?*

​ग्रामीणों और स्थानीय जागरूक नागरिकों का कहना है कि बिना किसी मिलीभगत के इतनी बड़ी मात्रा में चोरी होना संभव नहीं है यह आशंका गहरा रही है कि सीआईएसएफ जवानों के संरक्षण में ही यह पूरा गोरखधंधा फल-फूल रहा है सुरक्षा के नाम पर तैनात बल अब भ्रष्टाचार और आम जनता के उत्पीड़न का पर्याय बनता जा रहा है ।

*​मांग:-*

क्षेत्र की जनता ने SECL प्रबंधन और उच्च अधिकारियों से मांग की है कि:-

01. ​श्रमिक चौक पर ग्रामीणों के साथ दुर्व्यवहार करने वाले जवानों पर कड़ी कार्रवाई हो ।
02. ​खदान के भीतर हो रही संगठित चोरी की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए ।
03. ​आम रास्ते पर आवागमन सुचारू रूप से बहाल किया जाए ।

​यदि प्रबंधन और प्रशासन जल्द ही इस तानाशाही और भ्रष्टाचार पर लगाम नहीं लगाता तो क्षेत्र के ग्रामीण उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगे ।

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