खदान में घटित घटना में एक कर्मी की मौत, श्रमिक नेताओ ने बताया विस्फोटक का किया जा रहा सुरक्षा मानकों के विपरीत उपयोग…….

Rajesh Kumar Mishra
Rajesh Kumar Mishra
4 Min Read

NOW HINDUSTAN. Korba सार्वजनिक क्षेत्र के वृहद उपक्रम कोल् इंडिया की अनुसांगिक कंपनी एसईसीएल बिलासपुर के अधीन कोरबा-पश्चिम क्षेत्र में स्थापित एवं संचालित खुले मुहाने की राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त गेवरा कोयला परियोजना क्षेत्र अंतर्गत एसईसीएल की मेगा दीपका कोयला खदान परिक्षेत्र में आज पुनः एक अत्यंत ही दर्दनाक हादसे को लेकर गहन अफरा-तफरी सी मच गयी एक और जहा कोयला उत्खनन का कार्य जारी था उसी समय खदान में प्रयुक्त होने वाले विस्फोट की तेज ध्वनि हुई और वहा एक कर्मी लखन पटेल उसकी चपेट में आ गए लखन पटेल निकटस्थ ग्राम रेकी निवासी बताया जा रहा हैं उसकी घटना स्थल पर ही मृत्यु हो गयी।

- Advertisement -

इस घटना के कारण और परिणीती के संबंध में अभी तो अधिकृत तौर पर कुछ कहना उचित नहीं क्योकि सब बातो का खुलासा तो विस्तृत एवं अधिकृत जांच पश्चात ही स्पस्ट होगा, किन्तु घटना के बाद वहा विशाल भीड़ एकत्रित हो गयी और इस घटना के संबंध में आरोपित किया गया की कोयला प्रबंधन की अमानक विस्फोटक के बिना किसी व्यवस्था सुचना के प्रयुक्त कर दिया गया वास्तविक तथ्यों की जानकारी जुटाने में अभी समय लगेगा, किन्तु प्रारंभिक तौर पर वहा एकत्रित हुए जमावड़े ने अपने-अपने आंकलन के घोड़े दौड़ाने लगे इस दौरान मुख्य रूप से यह बात कही गयी की कोयला उत्खनन हेतु उपयोग में लाये जाने वाले बारूद के मानक और प्रक्रिया की अनदेखी से यह दुखद घटना घटित हुई हैं।

बताया जा रहा है कि सुरक्षा मानकों को दरकिनार कर ब्लास्टिंग कराई जा रही थी, जिसकी चपेट में आकर कर्मी की घटना स्थल पर ही मृत्यु हो गई।

इस घटना के बाद खदान क्षेत्र में आक्रोश का माहौल है। कर्मचारियों और श्रमिक संगठनों ने दीपका प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि यहां पहले भी कई बार नियमों की अनदेखी कर उत्पादन के दबाव में जान जोखिम में डाली गई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि दीपका खदान में “उत्पादन पहले, सुरक्षा बाद में” की नीति खुलेआम चल रही है। अगर समय रहते अमानक ब्लास्टिंग पर रोक लगाई जाती और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई होती, तो शायद आज एक और परिवार उजड़ने से बच जाता।

भू-विस्थापित किसान कल्याण समिति के अध्यक्ष ​सपुरन कुलदीप ने इस घटना पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए एसईसीएल प्रबंधन और खान सुरक्षा निदेशालय को आड़े हाथों लेते हुए कहा हैं कि यह कोई दुर्घटना नहीं बल्कि प्रबंधन द्वारा की गई घोर लापरवाही का परिणाम हैं, खदानों में ब्लास्टिंग के दौरान निर्धारित सुरक्षा मानकों का पालन नहीं किया जा रहा है, रिहायशी इलाकों और सार्वजनिक सड़कों के इतने करीब बिना उचित घेराबंदी और सुरक्षा चेतावनी के हैवी ब्लास्टिंग करना सीधे तौर पर लोगों की जान से खिलवाड़ है।
​ भू-विस्थापित किसान कल्याण समिति ने मांग करते हुए कहा हैं कि खान सुरक्षा निदेशालय और एसईसीएल के संबंधित लापरवाह अधिकारियों के खिलाफ तत्काल दंडात्मक कार्यवाही और एफआईआर दर्ज की जाए। मृतक लखन पटेल के परिजनों को तत्काल 50 लाख रुपये की आर्थिक सहायता राशि प्रदान की जाए। परिवार के एक सदस्य को योग्यतानुसार एसईसीएल में स्थायी नौकरी दी जाए। दीपका क्षेत्र में चल रही ब्लास्टिंग की तत्काल समीक्षा की जाए ताकि भविष्य में ऐसी पुनरावृत्ति न हो।

अध्यक्ष सपुरन कुलदीप ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि प्रबंधन और प्रशासन जल्द ही हमारी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लेते तो संगठन उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होगा जिसकी संपूर्ण जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी। समिति ने मांग की है कि घटना स्थल का निरीक्षण कर उच्च स्तरीय जांच कमेटी गठित की जाए और जब तक न्याय नहीं मिलता सुवाभोंड़ी फेस का कार्य बंद रखा जाए।

Share this Article