पूर्व गृहमंत्री ननकीराम कंवर के पत्र पर संज्ञान लेते हुए दिए गए जांच के निर्देश , केंद्र सरकार ने छत्तीसगढ़ मुख्य सचिव को लिखा पत्र…….

Rajesh Kumar Mishra
Rajesh Kumar Mishra
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NOW HINDUSTAN. Korba.  छत्तीसगढ़ प्रदेश के पूर्व गृहमंत्री एवं वरिष्ठ आदिवासी नेता ननकीराम कंवर द्वारा भेजे गए पत्र को गंभीरता से लेते हुए भारत सरकार ने छत्तीसगढ़ के मुख्य सचिव को जांच के निर्देश दिए हैं। केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि मामले की शीघ्र जांच कर विस्तृत रिपोर्ट भारत सरकार को भेजी जाए।

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* पीएमओ तक पहुंचा था मामला

पूर्व गृहमंत्री ननकीराम कंवर ने यह पत्र सीधे प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) को भेजा था। अपने पत्र में उन्होंने कोरबा जिले में सड़क निर्माण कार्यों और जिला खनिज न्यास (डीएमएफ) फंड के उपयोग में गंभीर अनियमितताओं का आरोप लगाया था।

* सड़क निर्माण और डीएमएफ पर उठाए सवाल

श्री कंवर ने पत्र में उल्लेख किया था कि कोरबा जिले में कई सड़क निर्माण कार्यों में गुणवत्ता से समझौता किया गया है, वहीं डीएमएफ की राशि का नियमों के विपरीत उपयोग होने की आशंका है। उन्होंने इन मामलों की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच की मांग की थी।

* राज्य सरकार पर बढ़ा दबाव

केंद्र सरकार के इस पत्र के बाद अब राज्य प्रशासन पर दबाव बढ़ गया है। मुख्य सचिव को निर्देशित किया गया है कि वे संबंधित विभागों से समन्वय कर तथ्यों की जांच कराएं और तय समय-सीमा में रिपोर्ट प्रस्तुत करें। मामले में केंद्र के हस्तक्षेप के बाद प्रदेश की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। माना जा रहा है कि जांच की रिपोर्ट आने के बाद जिम्मेदार अधिकारियों और एजेंसियों पर कार्यवाही भी संभव है।

* शासकीय फंड से निजी कंपनी को लाभ पहुंचाने का आरोप

ननकीराम कंवर ने केंद्र सरकार को लिखे पत्र में आरोप लगाया था कि जिस सड़क का निर्माण एक निजी कंपनी को अपने बजट या कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (सीएसआर) फंड से करना चाहिए, उसे शासकीय फंड से बनवाकर कंपनी को अनुचित लाभ पहुंचाया जा रहा है। यह मामला दर्री के ध्यानचंद चौक से लेकर परसाभाठा बालको तक प्रस्तावित सड़क से जुड़ा बताया जा रहा है, जिसका उपयोग मुख्य रूप से कंपनी के भारी वाहनों के आवागमन हेतु बताया जा रहा है।

शिकायत के अनुसार जिला प्रशासन ने इस सड़क के निर्माण के लिए जिला खनिज संस्थान न्यास (डीएमएफ) मद से लगभग 26 करोड़ रुपये स्वीकृत कर दिए हैं। श्री कंवर का तर्क है कि डीएमएफ राशि का उद्देश्य खनन प्रभावित क्षेत्रों और ग्रामीणों के विकास पर खर्च करना है, न कि किसी बड़ी निजी कंपनी का खर्च बचाना हैं।

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