बिदुपुर मे पत्रकारो पर जान लेवा हमला, पत्रकारों के हमले का जिम्मेदार कौन ……

Rajesh Kumar Mishra
Rajesh Kumar Mishra
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NOW HINDUSTAN. Korba/ Bihar.  बिदुपुर जहांगीरपुर /वैशाली यह खबर अब सिर्फ हमला नहीं, बल्कि अपहरण और जानलेवा धमकी का मामला बन चुकी है। पत्रकारिता के क्षेत्र में काम करने वालों को धमकाना एक आम बात हो चुकी है पत्रकार जान जोखिम में डालकर भ्रष्टाचार के मामलों को जाकर करते हैं लेकिन शासन प्रशासन उन्हें किसी प्रकार का कोई सहयोग नहीं करता है ऐसा ही एक मामला सामने आया है

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बिदुपुर प्रखंड के सीधे-सज्जन, ईमानदार और निर्भीक पत्रकार, “आवाज़ आपकी” चैनल से जुड़े मृत्युंजय कुमार के साथ आज जो हुआ, वह लोकतंत्र और पत्रकारिता—दोनों पर सीधा हमला है।
मिली जानकारी के अनुसार दो दिन पहले पत्रकार मृत्युंजय कुमार ने बिदुपुर थाना क्षेत्र के जहांगीरपुर गांव से प्रधानमंत्री आवास योजना में हो रहे भ्रष्टाचार का वीडियो अपने चैनल पर प्रसारित किया था।
इसी खबर से बिदुपुर के मुखिया प्रतिनिधि ब्रज सिंह बुरी तरह बौखला गए। बुधवार को जब पत्रकार मृत्युंजय किसी दूसरी खबर के सिलसिले में इलाके में पहुंचे तो मुखिया प्रतिनिधि ब्रज सिंह ने 4–5 आपराधिक प्रवृत्ति के लोगों के साथ मिलकर उन्हें जबरन अपने गोदाम में अगवा कर लिया।

गोदाम के अंदर पत्रकार के साथ बेरहमी से मारपीट की गई,
उन्हें घसीटा गया और फिर मुंह में पिस्टल घुसाकर जान से मारने की धमकी दी गई। इतना ही नहीं, पत्रकार के मोबाइल फोन से सारे वीडियो और फुटेज जबरन डिलीट कर दिए गए ताकि भ्रष्टाचार की सच्चाई बाहर न आ सके।
धमकी साफ शब्दों में दी गई—
“अगर कहीं बताया या दोबारा खबर चलाई,
तो तुम्हें और तुम्हारे बच्चों को दुनिया से मिटा देंगे।”
इसके बावजूद पत्रकार मृत्युंजय ने साहस दिखाया।
इलाके के दबंग और प्रभावशाली लोगों के आगे झुकने के बजाय
उन्होंने भारत सिंह और उसके साथियों के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। गंभीर रूप से घायल पत्रकार का
इलाज फिलहाल सदर अस्पताल, हाजीपुर में चल रहा है।

अब सबसे बड़ा सवाल यह है—
अगर छोटे-छोटे पदों पर बैठे मुखिया और उनके प्रतिनिधि
इस तरह पत्रकारों को अगवा कर, पीटकर, पिस्टल दिखाकर खबर दबाने लगेंगे, तो फिर पत्रकारिता के सिद्धांत, निष्पक्षता और सच बोलने की आज़ादी कहां बचेगी यह मामला सिर्फ एक पत्रकार का नहीं, यह पूरी पत्रकार बिरादरी के सम्मान और सुरक्षा का सवाल है।

अब निगाहें प्रशासन और पुलिस पर टिकी हैं—
क्या दोषियों पर कड़ी कार्रवाई होगी या फिर सच दिखाने की कीमत
पत्रकारों को इसी तरह चुकानी पड़ेगी?

संवाददाता राजेन्द्र कुमार

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