NOW HINDUSTAN. Korba. दयालपुर /वैशाली कार्यक्रम का मंच संचालन कार्यक्रम पदाधिकारी प्रो. रवि रंजन कुमार ने किया. सबसे पहले प्राचार्य डॉ श्याम रंजन प्रसाद सिंह, शिक्षकों एवं छात्रों ने सुभाष चंद्र बोस के तस्वीर पर पुष्पांजलि अर्पित किया. प्राचार्य ने छात्रों को संबोधित करते हुए कहा पराक्रम हमारे साहस का प्रतीक हैं. देश ने गुलामी को चुनौती दी थी. पराक्रम हमारे विचारों में ही नहीं बल्कि व्यवहारों में भी होना चाहिए. हमारा सर्वोपरि लक्ष्य देश की सेवा होना चाहिए. आजादी का मार्ग अहिंसा के अलावा साहस, संगठन और समर्पण भी हो सकता हैं. हमे देश हित को सर्वोपरी रखते हुए कार्य करते रहना चाहिए. यह वो समय था जब सुभाष चंद्र बोस ने सेना को संगठित किया एवं आजादी का एहसास आम नागरिकों को कराया।
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प्रो. अनामिका कुमारी ने कहा कि देश से परे कुछ भी नहीं है. साहस वो हथियार हैं कि इंसान किसी की समस्या का समाधान खोज लेता है. इसीलिए हमे सुसंगठित हो देश के लिए कार्य करते रहना चाहिए. तब देश सचमुच में विश्व गुरु बनेगा. कार्यक्रम में धन्यवाद ज्ञापन प्रो. सुशील कुमार ने दिया. अनेकों छात्र सचिन कुमार, सोनू कुमार, नीरज कुमार एवं छात्राओं में रोशनी कुमारी, नेहा कुमारी, मेघा कुमारी, स्मिता कुमारी ने भी विचार प्रकट किया.
संवाददाता राजेन्द्र कुमार

