अदानी कोरबा पावर लिमिटेड (पूर्व में लैंको अमरकंटक पावर लिमिटेड) द्वारा पताड़ी (कोरबा) स्थित 1600 मेगावाट विद्युत परियोजना के विस्तार हेतु प्रस्तावित जनसुनवाई को तत्काल रोकने एवं पुनर्विचार की मांग…..

Rajesh Kumar Mishra
Rajesh Kumar Mishra
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NOW HINDUSTAN. Korba.पताड़ी स्थित लैंको पावर अमरकंटक सयंत्र के अधिग्रहण के बाद अदानी पावर द्वारा कोरबा थर्मल पावर स्टेशन के विस्तार का कार्य शुरू करते हुए पर्यावर्णीय जन सुनवाई प्रस्तावित किया गया है। जिसकी जनसुनवाई संभवत 27 फरवरी को होनी है। जिसके लिए प्रशासनिक स्तर पर तैयारी भी शुरू हो गई है।

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युवा कॉग्रेस कोरबा पवन विष्वकर्मा ने कोरबा कलेक्टर को ज्ञापन सौंप कर जनसुनवाई रोकने की मांग की है। पवन विश्वकर्मा का कहना है कि Adani Korba Power Limited (Formerly Lanco Amarkantak Power Limited) 1600 मेगावाट विद्युत परियोजना के विस्तार हेतु आयोजित की जाने वाली आगामी जनसुनवाई के प्रति स्थानीय नागरिकों, किसानों, श्रमिकों एवं युवाओं में गहरा असंतोष एवं आक्रोश व्याप्त है।

युवा कांग्रेस कोरबा के पदाधिकारी पवन विश्वकर्मा एवं स्थानीय प्रभावित नागरिकों की ओर से निवेदन है कि अदानी कोरबा पावर लिमिटेड द्वारा लैंको अमरकंटक पावर लिमिटेड के अधिग्रहण के बाद पताड़ी स्थित थर्मल पावर प्लांट के विस्तार (2×800 MW या संबंधित क्षमता) के लिए पर्यावरणीय जनसुनवाई प्रस्तावित की गई है, जो संभवतः 27 फरवरी 2026 को सरगबुंदिया हायर सेकेंडरी स्कूल के मैदान में आयोजित होने वाली है।

इस जनसुनवाई के प्रति क्षेत्र के स्थानीय निवासियों, किसानों, श्रमिकों, युवाओं एवं पर्यावरण प्रेमियों में गहरा असंतोष एवं आक्रोश व्याप्त है। कारण निम्नलिखित हैं:

पहले से मौजूद गंभीर पर्यावरणीय एवं स्वास्थ्य प्रभाव:

वर्तमान में संचालित प्लांट से क्षेत्र में वायु प्रदूषण, जल स्रोतों का दूषित होना, कृषि भूमि की उर्वरता में कमी तथा फ्लाई ऐश/कोयला धूल के कारण स्थानीय जनता का जीवन दूभर हो चुका है। सांस संबंधी रोग, त्वचा रोग एवं अन्य स्वास्थ्य समस्याएँ बढ़ रही हैं। बिना इन पूर्व प्रभावों का वैज्ञानिक एवं स्वतंत्र आकलन किए तथा स्थानीय समस्याओं का समुचित समाधान किए बिना परियोजना का आगे विस्तार करना पूर्णतः जनहित के विरुद्ध है।

जनसुनवाई प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी:

प्रभावित ग्रामों के निवासियों को पर्याप्त एवं समय पर जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई है। सभी दस्तावेज (EIA रिपोर्ट, पर्यावरण प्रभाव आकलन, सारांश आदि) स्थानीय भाषा (हिंदी/छत्तीसगढ़ी) में स्पष्ट रूप से उपलब्ध नहीं हैं। इससे सार्थक भागीदारी एवं वास्तविक राय व्यक्त करना असंभव हो जाता है।

स्थानीय सहमति की अनदेखी:

किसी भी बड़े पैमाने की औद्योगिक परियोजना में स्थानीय जनता की सहमति एवं विश्वास सर्वोपरि होना चाहिए। बिना व्यापक सहमति के विस्तार कार्य प्रारंभ करना लोकतांत्रिक मूल्यों एवं पर्यावरण न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन होगा।

हमारी प्रमुख मांगें:

प्रस्तावित जनसुनवाई को तत्काल स्थगित/रोका जाए।

पूर्व में हुए पर्यावरणीय क्षति का स्वतंत्र वैज्ञानिक अध्ययन कराया जाए तथा प्रभावितों को उचित मुआवजा एवं स्वास्थ्य सुविधाएँ प्रदान की जाएँ।

जनसुनवाई से पूर्व सभी प्रासंगिक दस्तावेज स्थानीय भाषा में प्रभावित ग्रामों में सार्वजनिक किए जाएँ तथा कम से कम 30 दिनों का पर्याप्त समय दिया जाए।

विस्तार कार्य केवल तभी आगे बढ़ाया जाए, जब स्थानीय जनता की पूर्ण सहमति एवं समस्याओं का स्थायी समाधान सुनिश्चित हो।
हम विश्वास करते हैं कि आप इस जनहित से जुड़े गंभीर मुद्दे पर त्वरित एवं संवेदनशील कार्रवाई करेंगे तथा क्षेत्र की पर्यावरण, कृषि, जल एवं जनस्वास्थ्य रक्षा में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

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