जिले की महिला पत्रकारों ने देखी बस्तर की ‘ग्राउंड जीरो’ रिपोर्ट-आईजी सुंदरराज पी. और जांबाज अधिकारियो से सुनी बदलाव की कहानी…..

Rajesh Kumar Mishra
Rajesh Kumar Mishra
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महिला नक्सलियों ने बंदूकों का दहशत भरा आलिंगन त्याग थामी रसोई की कमान

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NOW HINDUSTAN. कोरबा  बताया जा रहा हैं कि कभी बारूद के धुएं और नक्सली दहशत के लिए पहचाना जाने वाला छत्तीसगढ़ का बस्तर अंचल अब विकास और विश्वास की नई इबारत लिख रहा है। छत्तीसगढ़ प्रदेश के उद्योग एवं श्रम मंत्री लखनलाल देवांगन की विशेष पहल पर कोरबा जिले की महिला पत्रकारों के एक विशेष दल ने बस्तर अंचल का दौरा कर वहां की बदलती सामाजिक और सुरक्षा स्थिति का बारीकी से अध्ययन किया। इस दौरे में कोरबा जिले कि लब्धख्याति चैतन्य वरिष्ठ महिला पत्रकार रेनू जायसवाल, प्रतिमा सरकार, बीता चक्रवर्ती, आशा ठाकुर, रजनी चौहान, मिली आदि सम्मिलित रहे।

आईजी सुंदरराज पी. से हुई खास भेंट-मुलाकात

बस्तर प्रवास के दौरान महिला पत्रकारों के दल ने बस्तर आईजी सुंदरराज पी. से भेंट-मुलाकात की। उन्होंने जानकारी देते हुए बताया कि बस्तर में शांति बहाली केवल हथियारों के दम पर नहीं, बल्कि ग्रामीणों का भरोसा जीतकर संभव हुई है।

चुनौतीपूर्ण अभियान
गढ़-चिरौली जैसे कठिन भौगोलिक क्षेत्रों में सुरक्षा बलों ने सुनियोजित तरीके से नक्सलियों के पैर उखाड़े हैं।
* बदलाव की सोच
आईजी के अनुसार, अब बड़ी संख्या में नक्सली संगठन का साथ छोड़कर लोकतंत्र और संविधान पर भरोसा जताते हुए मुख्यधारा में लौट रहे हैं।

मैदान के वीरों डीएसपी दीपमाला और एसडीओपी राहुल उइके ने साझा किए अनुभव

यात्रा के दौरान डीएसपी दीपमाला ने टीम को उन पूर्व नक्सलियों से मिलवाया, जो अब बंदूक छोड़कर सामान्य नागरिक की तरह जीवन जी रहे हैं। वहीं दंतेवाड़ा में एसडीओपी राहुल कुमार उइके ने कई रोमांचक मुठभेड़ों और बचाव अभियानों के अनुभव साझा किए। इन जांबाज अधिकारियो की बातें सुनकर दल कि सदस्या भावुक हो उठी। दंतेवाड़ा में साधना न्यूज़ स्थानीय वरिष्ठ पत्रकार अर्जुन पांडेय ने भी क्षेत्र में आए सकारात्मक बदलावों की जानकारी दी।

बंदूक छोड़ प्रमिला ने थामी रसोई की कमान

रिपोर्टिंग के दौरान सबसे मर्मस्पर्शी दृश्य जगदलपुर के ‘पंडुम रेस्टोरेंट’ में दिखा। वहां काम करने वाली प्रमिला कभी हाथ में एके-47 लेकर जंगलों में भटकती थी। आज वही प्रमिला चूल्हे की आंच पर स्वादिष्ट व्यंजन तैयार कर रही है। प्रमिला के साथ आसमाती, फूलमती और फगनी पोयाम जैसी महिलाएं अब आत्मसम्मान के साथ स्वावलंबन की राह पर हैं।

बदलते बस्तर के मुख्य स्तंभ

दहशत का अंत होने से बाजारों में रौनक लौटी और सड़कें हुई गुलजार, ग्रामीणों का प्रशासन और सुरक्षा बलों के प्रति सकारात्मक नजरिया बढ़ रहा हैं। आत्मसमर्पित महिलाये आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर हो रही हैं।
कोरबा की चैतन्यपूर्ण साहसी वरिष्ठ महिला पत्रकारों की यह यात्रा इस बात का प्रमाण है कि बस्तर अब संघर्ष की बेड़ियों को तोड़कर शांति, विकास और विश्वास के नए युग में प्रवेश कर चुका है। महिला पत्रकारों ने जमीनी तौर पर इस बात को स्वीकार किया कि बदलाव कि बयार जितनी अद्भुत रोमांचक और हैरतअंगेज तरीक से स्वछंदवादियो में जिस बदलाहट के साथ प्रवाहित होती स्पष्ट परीलक्षित हुई। उससे निर्विवाद रूप से यह स्वीकार किया जा सकता हैं कि सचमुच बदलाव का परिवेश उस अंचल में स्थापित हो चुका हैं।

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