NOW HINDUSTAN. Bihar News-कृषि विज्ञान केंद्र वैशाली में संतुलित उर्वरक उपयोग विषय पर एक जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया.। यह कार्यक्रम वरीय वैज्ञानिक एवं प्रधान डॉ. अनिल कुमार सिंह के दिशा-निर्देशन में संपन्न हुआ. कार्यक्रम में डॉ. कविता वर्मा (वैज्ञानिक) एवं इंजीनियर कुमारी नम्रता (कृषि अभियंत्रण) , डॉ जोना देखो,[उद्यान] ने किसान महिलाओं को संतुलित उर्वरक के उपयोग के फायदे के बारे में विस्तार से जानकारी दी. उन्होंने बताया कि संतुलित उर्वरक के उपयोग से न केवल फसल उत्पादन बढ़ता है बल्कि मिट्टी के स्वास्थ्य में भी सुधार होता है.
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वरीय वैज्ञानिक एवं प्रधान डॉ. अनिल कुमार सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि किसानों को केवल नाइट्रोजन (यूरिया) पर निर्भर रहने के बजाय फास्फोरस , एवं पोटाश का भी सही अनुपात में उपयोग करना चाहिए. उन्होंने बताया कि यदि किसान संतुलित मात्रा में उर्वरकों का प्रयोग करते हैं तो फसल की गुणवत्ता एवं उपज में 15 से 25 प्रतिशत तक वृद्धि संभव है. कार्यक्रम के दौरान संतुलित उर्वरक उपयोग के मुख्य लाभों जैसे उत्पादन में वृद्धि, फसल की गुणवत्ता में सुधार तथा पर्यावरण संरक्षण पर भी विस्तार से चर्चा की गई.
कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को सलाह दी कि उर्वरकों का उपयोग मिट्टी परीक्षण के आधार पर ही करना चाहिए ताकि सही मात्रा में पोषक तत्वों की पूर्ति हो सके. इस कार्यक्रम में ठाठान बुजुर्ग, इस्लामपुर दामोदरपुर एवं बखरी बरई गांवों के किसान एवं किसान महिलाएं उपस्थित रहीं और उन्होंने संतुलित उर्वरक उपयोग के विषय में महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त की।
संवाददाता राजेन्द्र कुमार