पीएम जनमन सड़क में भ्रष्टाचार का ग्रामीणों ने खोली पोल, पंचायत पतरापाली–कोरवा बस्ती मार्ग पर जांच की उठी मांग, जनदर्शन में हुई शिकायत.. देखें वीडियो…

Rajesh Kumar Mishra
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NOW HINDUSTAN. Korba. जिले में आयोजित जनदर्शन कार्यक्रम (04 मई 2026) के दौरान प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत निर्मित सड़क की गुणवत्ता को लेकर गंभीर शिकायत सामने आई है। शिकायतकर्ता ने ग्राम पंचायत पतरापाली से पहाड़ी कोरवा बसाहट तक बनी लगभग एक किलोमीटर लंबी सड़क में भारी अनियमितता और भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, उक्त सड़क का निर्माण पीएम जनमन योजना के अंतर्गत लगभग 64.44 लाख रुपये की लागत से कराया गया है। कार्य का निष्पादन ठेकेदार मेसर्स श्री साई एसोसिएट, रायगढ़ द्वारा किया गया।

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हालांकि, शिकायत में आरोप लगाया गया है कि निर्माण कार्य की गुणवत्ता बेहद निम्न स्तर की है और इसमें व्यापक लापरवाही बरती गई है। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क निर्माण में मानकों की अनदेखी कर भ्रष्टाचार को बढ़ावा दिया गया है। शिकायतकर्ता ने यह भी आरोप लगाया कि इस पूरे मामले में संबंधित विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध है। विशेष रूप से कार्यपालन अभियंता, ग्रामीण यांत्रिकी सेवा, कोरबा की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए गए हैं।

उनका कहना है कि ठेकेदार और अधिकारियों की मिलीभगत से घटिया निर्माण कार्य को अंजाम दिया गया, जिससे शासन की मंशा पर पानी फिर रहा है। गौरतलब है कि केंद्र सरकार द्वारा संचालित ‘प्रधानमंत्री जनजातीय आदिवासी न्याय महाअभियान (पीएम जनमन)’ का उद्देश्य विशेष रूप से आदिवासी क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं का विस्तार कर सामाजिक और आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ करना है। पहाड़ी कोरवा जैसे विशेष पिछड़ी जनजाति क्षेत्रों के लिए यह योजना अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है। ऐसे में सड़क जैसी बुनियादी सुविधा में अनियमितता के आरोप न केवल योजना की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े करते हैं, बल्कि स्थानीय समुदाय के विकास पर भी प्रतिकूल प्रभाव डालते हैं।

जनदर्शन में प्रस्तुत इस शिकायत के बाद अब प्रशासन की भूमिका अहम हो गई है। ग्रामीणों ने मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषी ठेकेदार, संबंधित अधिकारी और इंजीनियरों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में इस प्रकार की लापरवाही की पुनरावृत्ति न हो। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि सरकार द्वारा आदिवासी क्षेत्रों के विकास के लिए करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं, लेकिन यदि जमीनी स्तर पर गुणवत्ता सुनिश्चित नहीं की गई, तो योजनाओं का वास्तविक लाभ जरूरतमंदों तक नहीं पहुंच पाएगा। ऐसे में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना समय की मांग बन गई है।

जिस प्रकार से मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की सरकार साय सायं चल रही है उसके विकास कार्य के रथ को रोकने के लिए अधिकारी और ठेकेदार भी भ्रष्टाचार को सायं सायं चला रहे हैं अब देखना है कि ठेकेदारों और अधिकारियों की इस भ्रष्टाचार को रोकने में कौन सामने आता है।

 

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