49 लाख के फीकल स्लज ट्रीटमेंट प्लांट निर्माण पर सवाल, दरारों के बीच गुणवत्ता की परीक्षा…….

Rajesh Kumar Mishra
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रोगबहरी में ढलाई की खामियों को प्लास्टर से ढकने का आरोप, जिला सीईओ ने जांच और कार्रवाई का दिया भरोसा

NOW HINDUSTAN  कोरबा सरकारी  योजनाओं के तहत स्वच्छता व्यवस्था को मजबूत करने के लिए करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं, लेकिन इन योजनाओं की सफलता केवल निर्माण पूरा होने से नहीं, बल्कि गुणवत्ता और टिकाऊपन से तय होगी। ग्राम पंचायत जामबहार के गांव रोगबहरी में करीब 49 लाख रुपये की लागत से निर्माणाधीन फीकल स्लज ट्रीटमेंट प्लांट (FSTP) इसी कसौटी पर सवालों के घेरे में है। निर्माण की ढलाई में दरारें और खामियां होने तथा उन्हें प्लास्टर के जरिए छिपाने के आरोप सामने आए हैं। यदि ये आरोप जांच में सही पाए जाते हैं, तो यह केवल निर्माण की कमी नहीं, बल्कि सरकारी धन के सदुपयोग और कार्यों की निगरानी पर भी गंभीर सवाल खड़े करेगा। स्वच्छ भारत मिशन के तहत जिले के पांचों विकासखंडों की ग्राम पंचायतों में फीकल स्लज ट्रीटमेंट प्लांट बनाए जा रहे हैं। इन संयंत्रों का उद्देश्य सेप्टिक टैंकों से निकाले जाने वाले मल-मिश्रित अपशिष्ट का वैज्ञानिक तरीके से उपचार करना है।

ऐसे महत्वपूर्ण ढांचे के निर्माण में निर्धारित तकनीकी मानकों, सामग्री की गुणवत्ता और मजबूत ढलाई का विशेष महत्व है। शुरुआती स्तर पर ही यदि निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल उठते हैं, तो उन्हें नजरअंदाज करने के बजाय समय रहते तकनीकी परीक्षण कराना जरूरी हो जाता है। जामबहार में निर्माण पंचायत एजेंसी के माध्यम से कराया जा रहा है। कार्य का ठेका पाली निवासी सत्यनारायण पैकरा को दिए जाने की जानकारी सामने आई है। निर्माण स्थल पर ढलाई की स्थिति और उसके बाद किए जा रहे प्लास्टर कार्य को लेकर सवाल उठाए गए हैं। हालांकि, आरोपों की वास्तविकता और निर्माण में तकनीकी खामियों की पुष्टि विभागीय जांच के बाद ही हो सकेगी।

जांच केवल औपचारिकता न बने- इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि निर्माण की गुणवत्ता का आकलन किस आधार पर किया जाएगा। केवल सतह पर प्लास्टर देखकर संतुष्ट हो जाना पर्याप्त नहीं होगा। स्वीकृत डिजाइन, तकनीकी प्राक्कलन, इस्तेमाल की गई निर्माण सामग्री, ढलाई की मजबूती और मौके पर हुए कार्य का निष्पक्ष परीक्षण जरूरी है। जरूरत पड़ने पर तकनीकी विशेषज्ञों से जांच कराकर कमियों का स्पष्ट आकलन किया जाना चाहिए, ताकि वास्तविक स्थिति सामने आ सके। जिला पंचायत के सीईओ प्रतीक जैन ने निर्माण कार्य की जांच कराने और गड़बड़ी मिलने पर कार्रवाई का भरोसा दिया है। अब निगाहें इस बात पर रहेंगी कि जांच कितनी निष्पक्षता से होती है और उसके निष्कर्षों के आधार पर क्या कदम उठाए जाते हैं।

सरकारी निर्माण कार्यों में जवाबदेही का अर्थ केवल शिकायत मिलने पर जांच का आश्वासन देना नहीं, बल्कि निर्धारित गुणवत्ता सुनिश्चित करना भी है। यदि खामियां मिलती हैं, तो नियमानुसार जिम्मेदारी तय करने के साथ आवश्यक सुधार कराना चाहिए। रोगबहरी के FSTP की जांच यह स्पष्ट करने का अवसर है कि निर्माण निर्धारित मानकों के अनुरूप हो रहा है या नहीं। करीब 49 लाख रुपये की लागत वाले इस संयंत्र में गुणवत्ता से कोई समझौता न हो, यह सुनिश्चित करना संबंधित विभाग की जिम्मेदारी है।

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