तिलकेजा पंचायत में कथित आवास घोटाले से हड़कंप, 48 आवासों की फर्जी जियो-टैगिंग कर 20 लाख से अधिक की राशि दूसरे खाते में डाली गई…..

Rajesh Kumar Mishra
Rajesh Kumar Mishra
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NOW HINDUSTAN. Korba.  गरीबों को पक्के मकान देने की योजना कमाई का जरिया बन गया है। आवास निर्माण के नाम पर जमकर भ्रष्टाचार हो रहा है। सरकार की महत्वाकांक्षी प्रधानमंत्री आवास योजना  में कोरबा जिले के जनपद पंचायत क्षेत्र अंतर्गत ग्राम पंचायत तिलकेजा से कथित वित्तीय अनियमितता का मामला सामने आया है। आरोप है कि वर्ष 2024-25 के 48 पात्र हितग्राहियों के नाम पर फर्जी जियो-टैगिंग कर प्रथम किस्त की राशि जारी कर दी गई, जबकि वास्तविक हितग्राहियों को योजना का लाभ नहीं मिला।

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मामले ने योजना की पारदर्शिता और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों के अनुसार प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत मकान निर्माण शुरू करने के लिए प्रथम किस्त के रूप में प्रत्येक हितग्राही को 40 हजार रुपये दिए जाते हैं। आरोप है कि तिलकेजा पंचायत में 48 हितग्राहियों के नाम पर कथित रूप से फर्जी जियो-टैगिंग कर 20 लाख रुपये से अधिक की राशि जारी कर दी गई। सबसे गंभीर आरोप यह है कि योजना में दर्ज हितग्राहियों के नाम तो सही हैं, लेकिन भुगतान उनके बैंक खातों में न होकर अन्य खातों में पहुंच गया।

ग्रामीणों का यह भी आरोप है कि पात्र और अपात्र हितग्राहियों की सूची में भी हेरफेर किया गया। कई अपात्र लोगों को योजना का लाभ दिलाया गया, जबकि वास्तविक पात्र परिवार आज भी पहली किस्त का इंतजार कर रहे हैं। यदि ये आरोप सही साबित होते हैं तो यह न केवल सरकारी धन के दुरुपयोग का मामला होगा, बल्कि गरीब परिवारों के अधिकारों का भी गंभीर उल्लंघन माना जाएगा। जानकारी के अनुसार प्रधानमंत्री आवास योजना में निर्माण कार्य की प्रगति सुनिश्चित करने के लिए जियो-टैगिंग अनिवार्य प्रक्रिया है। यह कार्य आवास मित्र द्वारा किया जाता है। इसके बाद सरपंच और सचिव प्रस्ताव तैयार कर संबंधित अधिकारियों को भेजते हैं तथा सत्यापन के बाद हितग्राही के खाते में राशि जारी की जाती है।

आरोप है कि तिलकेजा पंचायत में इसी प्रक्रिया में कथित मिलीभगत कर फर्जी जियो-टैगिंग तैयार की गई और बिना प्रभावी जांच के भुगतान कर दिया गया। ग्रामीणों का दावा है कि कई ऐसे हितग्राही हैं, जिनके नाम पर सरकारी रिकॉर्ड में राशि जारी होना दर्शाया गया है, लेकिन उनके बैंक खातों में एक भी रुपये नहीं पहुंचे। ऐसे में यह सवाल उठ रहा है कि आखिर भुगतान किन खातों में और किस आधार पर किया गया। मामले में आवास मित्र, पंचायत स्तर के जिम्मेदार प्रतिनिधियों तथा संबंधित अधिकारियों की भूमिका की निष्पक्ष जांच की मांग की जा रही है।हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि फिलहाल नहीं हुई है। यदि जांच में अनियमितताओं की पुष्टि होती है तो यह प्रधानमंत्री आवास योजना में बड़े वित्तीय फर्जीवाड़े के रूप में सामने आ सकता है। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच कराने, दोषियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई करने और वास्तविक पात्र हितग्राहियों को योजना का लाभ दिलाने की मांग की है। उनका कहना है कि इसमें जनप्रतिनिधियों की भी मिली भगत हो सकती है।

वहीं ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन इस मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध शीघ्र कार्रवाई नहीं करता, तो वे मुख्यमंत्री हेल्पलाइन में शिकायत दर्ज कराएंगे। उनका कहना है कि प्रधानमंत्री आवास योजना में हुई कथित अनियमितताओं की उच्चस्तरीय जांच कर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए। अब निगाहें प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हैं कि जांच के बाद इस पूरे मामले की सच्चाई कब और कैसे सामने आती है।

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